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नान घोटाले में वेयरहाउस प्रबंधक शर्मा  को चार साल की सजा

नान का घोटाला उजागर करने के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने 12 फरवरी को रायपुर स्थित नान के मुख्यालय सहित 36 अलग-अलग जिलों के आफिसों और कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों के घरों में छापे मारे थे। सभी जगह छापे से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये मिले थे।

बालोद– प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सरोजनंद दास ने सात साल पुराने नान घोटाला मामले में बालोद वेयर हाउस में पदस्थ रहे प्रबंधक दिलीप शर्मा को चार साल सश्रम कारावास व 50,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

अतिरिक्त लोक अभियोजक के अनुसार आरोपित दिलीप कुमार शर्मा सहकारी खाद्य विपणन समिति में 2014-15 में प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे। तब एसीबी रायपुर को आरोपित के पास आय से अधिक संपत्ति अर्जन करने की सूचना मिली। एसीबी रायपुर के निर्देशन में तत्कालीन विवेचक एसके सेन एवं उनके सहयोगियों द्वारा 12 फरवरी 2019 को आरोपित के बालोद स्थित मकान में छापा मारा गया।

आरोपित के कुरूद व रायपुर के मकान के कागजात तथा अलग-अलग बैंकों में दिलीप कुमार शर्मा के नाम पर व माता, पत्नी व बच्चों के बैंक खाते के पासबुक जब्त किया गया था। उसके पास से सोना, चांदी के जेवरात चारपहिया वाहन, दोपहिया वाहन व दैनिक उपभोग की वस्तुएं और लगभग 22,96,150 रुपये नकद मिले थे। प्रकरण में गवाहों के परीक्षण एवं दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर आरोपित दिलीप कुमार शर्मा के खिलाफ सबूत पाये जाने से दंडित किया गया।सात साल पहले नागरिक आपूर्ति निगम (नान) में छापे के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने रायपुर के मैनेजर शिव शंकर भट्ट सहित 12 अफसरों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था। आरोपितों को एनडी तिगाला की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था। सात आरोपियों ने जमानत की अर्जी लगाई थी। कोर्ट ने सभी का जमानत आवेदन निरस्त कर चार अप्रैल तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था।

एंटी करप्शन ब्यूरो ने सभी आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। अचानक गिरफ्तारी से नान के आरोपित अफसरों और कर्मचारियों में खलबली मच गई थी। किसी को उम्मीद नहीं थी कि उन्हें एकाएक गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उनके स्वजनों को भी तब खबर हुई जब उन्हें कोर्ट ले जाया गया।

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