मध्य प्रदेश

विधानसभा के बजट सत्र में सदन की व्यवस्था बदली हुई आएगी नजर

भोपाल
 विधानसभा स्पीकर गिरीश गौतम का एक वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया है। मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके इस कार्यकाल में किसी भी सदस्य की ओर से आसंदी पर आक्षेप नहीं लगा। यही उनकी सबसे बड़ी सफलता है। सरकार और विपक्ष दोनों की तरफ से सहयोग मिला है। उन्होंने बताया कि आगामी विधानसभा सत्र से एक बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं। यह बदलाव प्रश्नकाल से जुड़ा है। प्रश्नकाल के दौरान विधायक अपने प्रश्न से हटकर कोई बात नहीं कर सकेंगे। विधानसभा स्पीकर ने बताया कि विधायकों की प्रश्नोत्तरी आती है। यानी प्रश्नकाल में विधायक खड़े होकर पूरे प्रश्न पढ़ते हैं, फिर उसके उत्तर पढ़ते हैं। इसके बाद वे कहते हैं कि मैं इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हूं। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। अब किसी भी विधायक को प्रश्नकाल में प्रश्न-उत्तर नहीं पढ़ने दिया जाएगा।

अब सदन में विधायक को पूरी तैयार के साथ प्रश्नकाल में जाना होगा। अपना सवाल पॉइंट टू पॉइंट पूछना होगा, ताकि मंत्री को भी जवाब देने में सहूलियत हो सके। इस बदलाव के चलते विधानसभा में एक घंटा विधायकों की ब्रीफिंग की जाएगी। प्रश्नकाल में जिन विधायकों के प्रश्न लगे हैं उन्हें विधानसभा स्पीकर के कक्ष में बुलाया जाएगा। इस दौरान उन्हें बताया जाएगा कि किस तरह प्रश्न पूछना है। जिससे प्रश्नकाल में विधायकों द्वारा बनाई जाने वाली भूमिका में नष्ट होने वाले समय को खराब होने से बचाया जा सके। इससे प्रश्नकाल में से हर एक का उत्तर मिल सके। जिस तरह से मंत्री अपना उत्तर देने के लिए तैयार होकर आते हैं, उसी तरह प्रश्न करने वाले विधायक को तैयार होकर आना होगा।

इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ब्रीफिंग के बाद भी कोई विधायक इस व्यवस्था का पालन नहीं करता है तो उसके प्रश्न को पास कर अगले प्रश्न की ओर आगे बढ़ा जाएगा। दरअसल प्रशंकाल में सभी विधायकों के पूछे गए प्रश्नों के उत्तर मिल जाए इसके लिए यह व्यवस्था की गई है, नई व्यवस्था से हर एक विधायक प्रश्न और उत्तर पढ़ने के दौरान जो 8 से 10 मिनट खर्च करते हैं, उसे बचाया जा सकेगा। अब उसे सीधे पॉइंटेड बात रखनी होगी। वही विधानसभा अध्यक्ष ने न सिर्फ वर्तमान बल्कि भूतपूर्व विधायकों के लिए भी काम करते हुए 3 मार्च को बैठक बुलाई है। इस बैठक में भूतपूर्व विधायकों को बुलाया गया है, उनसे चर्चा की जाएगी। उनकी समस्याओं को सुना जाएगा। इसके बाद उनकी समस्याओं का निराकरण किया जाएगा।

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