छत्तीसगढ़रायगढ जिला

रायगढ़ : गौठान : पशु सुरक्षा के साथ बन रहे है आर्थिक गतिविधियों का केन्द्र : जोबी गौठान में महिला स्व-सहायता समूह ने वर्मी कम्पोस्ट बनाकर कमाया बढिय़ा मुनाफा

रायगढ़,राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के प्रोत्साहन और मदद से ग्रामीण विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ाते जा रहे है। रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम जोबी में गौठान में आय आधारित गतिविधियां जोर पकड़ते जा रही है।राज्य सरकार की पहल पर ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों को नियंत्रित कर फसलों को सुरक्षित रखने के लिए गौठानों का संचालन किया जा रहा है। इन गौठानों से जुड़े महिला स्व-सहायता समूह खेती-किसानी से संबंधित विभिन्न गतिविधियां प्रारंभ कर आर्थिक रूप से सक्षम हो रहे है। इसी कड़ी में खरसिया के ग्राम जोबी गौठान से उजाला स्व-सहायता समूह के 12 सदस्यों ने वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया है।उजाला समूह की सचिव श्रीमती अंबिका बाई राठिया एवं सदस्य लक्ष्मणी राठिया ने बताया कि अभी तक 40 क्ंिवटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन करके विक्रय किया जा चुका है जिसमें से 30 क्ंिवटल को रेशम विभाग ने क्रय किया है।

 ग्रामीण स्वयं के खेतों पर भी सब्जी की फसलों के उत्पादन के लिये  वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग कर रहे है।कैसे तैयार होता है वर्मी कम्पोस्टकृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री रामकिशोर पटेल ने बताया कि कम मेहनत व कम लागत पर भी कृषक वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन कर सकते है, खाद निर्माण टैंक में अधसड़ा फसल, अवशेष, गोबर इत्यादि मिलाकर डाल दिया जाता है, उसके एक सप्ताह बाद उसमें केचुवा डालने पर लगभग 3 से 4 माह में पूरी तरह से वर्मी कम्पोस्ट बनकर तैयार हो जाता है। इस प्रकार एक वर्ष में एक टैंक में तीन बार वर्मी कम्पोस्ट आसानी से बनाया जा सकता है। इसे बनाने के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है जो कि कृषि विभाग द्वारा नि:शुल्क दिया जाता है। बाजार में वर्मी कम्पोस्ट का मूल्य अभी 8-10 रुपये प्रति किलो ग्राम तक है। जैविक खेती करने में इसका विशेष महत्व है। इसके अलावा फूल के गमलों पर व पौधा रोपड़ में व दलहनी, तिलहनी फसलों पर इसका उपयोग करने से उत्पादन में वृद्धि होती है। इस बार जोबी गौठान से 60-70 क्ंिवटल वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन की संभावना है।कम मेहनत में अच्छी कीमत मिलने से समूह के सदस्यों में खासा उत्साह है। ग्रामवासी नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी योजना से ग्रामीण जुड़कर अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बड़ी संख्या में कार्य कर रहे है।

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