
कुरुक्षेत्र। वीरवार देर शाम भाखड़ा नहर में बहे दोनों दोस्तों के शव शुक्रवार को हादसे से करीब आधा किलोमीटर दूरी से बरामद कर लिए गए। नगर में बहे नाबालिगों को तलाशने के लिए गोताखोर प्रगट सिंह की टीम के साथ-साथ अंबाला से भी गोताखोर बुलाए गए। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों शव बरामद किए गए। शव मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। वीरवार को हादसे के कुछ देर बाद ही नाबालिगों को तलाशने के लिए सर्च अभियान शुरू किया गया था, लेकिन रात को अंधेरा होने के चलते रोक दिया गया। शुक्रवार सुबह फिर अभियान शुरू किया गया। मौके पर विधायक सुभाष सुधा, केयू आर्दश थाना एसएचओ देवेंद्र कुमार भी पहुंचे तो सैकड़ों की संख्या में लोग भी जमा हो गए। हादसे से करीब आधा किलोमीटर आगे ढांड रोड के समीप दोनों के शव आसपास ही मिले। बता दें वीरवार शाम साढ़े चार बजे साहिल अपने चार दोस्त मनजीत, मनदीप, श्रवण और संयम के साथ बाइक पर सेल्फी लेने के लिए गांव मिर्जापुर के नहर वाले रेलवे ट्रैक पर गए थे। नहर पर आकर साहिल ने नहाने के लिए ट्रैक से नहर में छलांग लगाई थी। कुछ देर नहाने के बाद वह बाहर आ गया था। उसे ऐसा करते देख श्रवण ने नहाने के नहर में जाने लगा, मगर उसे तैरना नहीं जानता था। साहिल के भरोसे पर वह नहर में कूद गया और पानी में बह गया था। उसे डूबता देख साहिल ने उसके पीछे छलांग लगा दी। साहिल ने उसका हाथ तो पकड़ लिया, मगर दोनों पानी के तेज बहाव में बह गए थे।
दोनों पहले दे चुके थे मौत को मात, अब हारेदोनों ही दोस्त मौत को पहले भी करीब से देख चुके थे ,लेकिन वे इसे मात देने में सफल रहे थे। अब गहरे पानी में जाने के चलते वे मौत से हार गए। परिजनों के मुताबिक साहिल मूल रूप से करनाल के गांव संडीर का रहने वाला है और जन्म के करीब डेढ़ साल बाद ही वह गंभीर रूप से बीमार हो गया था। चाचा कुलदीप सिंह ने बताया कि गंभीर बीमार होने पर एक बार चिकित्सकों ने भी जवाब दे दिया था और उसके बाद वह धीरे-धीरे ठीक हो पाया। उसी समय से ही खेड़ी रामनगर वासी उसके मामा ने उसे अपने पास रख लिया था। दो भाईयों में वह बड़ा था और 12वीं के बाद अब उसकी विदेश जाने की तैयारी थी। उधर दूसरे मृतक श्रवण के आसपास रहने वाले सुंदरपुर के लोगों के मुताबिक करीब छह माह पहले उसे सांप ने काट लिया था, लेकिन वह उस समय मौत के मुंह से बच गया था। अब नहर में डूब जाने से हर कोई हैरान है। वह पेंट का कार्य करने लगा था, ताकि अपने परिवार के लिए सहारा बन सके। उसके सिर से पिता का साया भी कई साल पहले उठ चुका है।





