फोरलेन पर सोमवार की दोपहर हुए हादसे में अगले दिन बड़े खुलासे हुए। पुलिस के अनुसार इस घटनाक्रम में बोलेरो चालक पीडब्ल्यूडी के एसडीओ पीएस दीवान थे। उनकी पदस्थापना राजनांदगांव पीडब्लूडी दफ्तर के क्रमांक-1 में है। हादसे के बाद मौके पर डायल-112 की जीप तो आई लेकिन घायल यश चौथवानी की जगह एसडीओ को बैठाकर अस्पताल ले गई। परिजन का आरोप है कि पुलिस ने यश को तत्काल उपचार मुहैया कराने की बजाय मौके पर ही अधमरा छोड़ दिया। दीवान को अस्पताल छोड़ने के बाद यश को ले जाया गया।
हादसे के बाद उनके एसडीओ के ड्राइवर का बयान लिया गया। पुलिस के बयान में चालक ने बताया कि गाड़ी एसडीओ दीवान ही चला रहे थे, वे अकेले थे। उनका निवास दुर्ग में है। वहां से आते वक्त अग्रवाल पेट्रोल पंप के पास यह हादसा हुआ है। बयान के बाद पुलिस फिलहाल एसडीओ दीवान की पतासाजी में जुटी हुई है।
अब तक उन्हें नहीं पकड़ा जा सका है। घटना के बाद से उनका मोबाइल भी बंद है। सोमवार रात पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ धारा 279, 337, 304 (ए) का मामला दर्ज किया है। वाहन बोलेरो CG-09-5161 में यह हादसा हुआ था।
अगर पुलिस मदद करती तो बच सकती थी जान
इस मामले में मृतक यश चौथवानी के परिजन ने आरोप लगाया है कि पुलिस के द्वारा घटनास्थल पर यश की बजाय एसडीओ दीवान की मदद की जा रही थी। सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट नजर आ रहा है कि दीवान अपनी गाड़ी से उतर रहे और उन्हें 112 के वाहन में बैठाकर ले जाया जा रहा है। जबकि उसी दौरान यश भी तड़प रहा था। उसकी कोई मदद नहीं की गई। पुलिस ने यश को अधमरा छोड़ दिया और दीवान को उपचार के लिए ले गए।
परिजन ने कहा: हिट एंड रन का मामला बनाया जाए
इस मामले में यश के पिता अनिल चौथवानी और चाचा विवेक चौथवानी ने कहा है कि मामले में एसडीओ दीवान के खिलाफ हिट एंड रन का मामला दर्ज होना चाहिए। पीछे से ठोकर मारने के बाद यश को मौके पर छोड़कर दीवान खुद उपचार के लिए निकल गए। कुछ स्थानीय पुलिस अफसरों ने भी वहां दीवान की मदद की। पूरी चीजें सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई हैं। आसपास के लोगों से भी बयान लिए जाने चाहिए।
- सर्वाधिक मौतें दुपहिया सवारों की, ज्यादातर हादसों का समय दोपहर 1 से रात 9 बजे के बीच
- सड़क हादसों का विश्लेषण किया गया तो यह पता चला कि सर्वाधिक हादसों में मृत्यु दुपहिया सवारों की है। इसका मुख्य कारण हेलमेट न पहनना, तीन सवारी, नशे में वाहन चलाना और यातायात नियमों की अनदेखी है। अधिकांश हादसे दोपहर एक बजे से रात 9 बजे के बीच हुए हैं।
- मोटर साइकिल से मोटरसाइकिल के टकराने के 56 प्रकरण में कुल 61 लोगों की मौत हुई है। जबकि मोटरसाइकिल में स्वयं ही हादसे का शिकार होने के 59 प्रकरण दर्ज हैं जिसमें 72 मौतें हुई हैं।
- भारी, मध्यम, हल्के वाहनों में स्वयं हादसे का शिकार होने के 22 प्रकरण हैं जिसमें 26 लोगों की मौतें हुई हैं। वहीं हल्के वाहन से हल्के वाहन टकराने के 12 प्रकरण में 12 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
- अज्ञात वाहन के 62 प्रकरण में 62 की मौत है। वहीं भारी वाहन से भारी वाहन के टकराने के 16 प्रकरणों में कुल 18 लोगों की मौत हुई है। जबकि भारी वाहन से मोटरसाइकिल टकराने के 30 प्रकरण में 30 की मौत दर्ज है। भारी वाहन से कार टकराने के 4 प्रकरण में 4 लोगों की मौत हुई है।
2020 की तुलना में 10.26% मौतें ज्यादा
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा मौतें: वर्ष 2021 में शहरी क्षेत्र में कुल 135 प्रकरण में 32 लोगों की मृत्यु और ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 691 प्रकरणों में 309 लोगों की मृत्यु हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में कुल दुर्घटना के लगभग 84 प्रतिशत में 91 फीसदी लोगों की मौत हुई है। रोड एक्सीडेंट के मामलों में नजर डालें तो 2020 की तुलना में 2021 में बढ़ोतरी हुई है। इसमें 1.21 प्रतिशत हादसे में वृद्धि हुई है। वहीं 10.26 फीसदी मौतों में वृद्धि पाई गई है। जबकि 1.75 प्रतिशत घायल बढ़े हैं।
कार व मध्यम वाहनों के टकराने से 25 मौतें: कार से कार टकराने के 4 प्रकरण में 5 लोगों की मौत हुई है। कार व मध्यम वाहन से मोटरसाइकिल के टकराने से 23 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें 25 लोगों की मौत हुई है। वहीं वाहनों के द्वारा पैदल चलने वाले को ठोकर मारने के 18 प्रकरणों में 18 लोगों की मौत और सभी प्रकार के वाहनों से साइकिल टकराने के 8 प्रकरण में 8 की मौत दर्ज है।