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केस-1बिजली नहीं, क्लब हाउस भी नहीं बना
वालफोर्ट ग्रुप के दतरेंगा स्थित प्रोजेक्ट वालफोर्ट पार्क व्यू के खिलाफ भी रेरा में मामला पहंुचा है। तिल्दा की रहने वाली भारती साहू ने बताया कि वर्ष-2018 में यहां रजिस्ट्री के बाद उन्हें जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई। अब तक ना तो क्लब हाउस बना और ना ही बिजली, पानी की व्यवस्था हो पाई। नामांतरण भी अभी तक नहीं किया गया है। इसके कारण बैंकों से ऋण नहीं मिल पा रहा है। दोनों पक्षों की दलील के बाद रेरा ने 6 अप्रैल को निर्णय दिया। जिसमें कहा गया कि तीन महीने के भीतर बाकी के विकास कार्य सुनिश्चित करने के साथ, भूखंड पर कब्जा सौंपा जाए।
केस-2दो महीने के भीतर जीएसटी और सरचार्ज में छूट दें
रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के प्रोजेक्ट इंद्रप्रस्थ फेस-2 को लेकर शिकायत में रेरा ने पीड़ित पक्ष को दो महीने के भीतर जीएसटी व सरचार्ज की राशि में छूट प्रदान करने का फैसला दिया। प्रकरण के मुताबिक, शांति नगर निवासी यासमीन बानो ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ईडबू्ल्यूएस फ्लैट की बुकिंग कराई थी। आरडीए ने समय पर प्रोजेक्ट का निर्माण नहीं किया। वहीं, अलग से जीएसटी और सरचार्ज के लिए दबाव बनाया। रेरा में सुनवाई के दौरान आरडीए कोई दलील पेश नहीं कर पाया। आखिरकार फैसला ग्राहक के पक्ष में गया।
केस-32017 में कब्जा सौंपना था, अभी तक नहीं मिला
आरंग निवासी ममता बंजारे के प्रकरण में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के अंर्तगत योजना की लांचिंग की थी। प्रोजेक्ट का आधिपत्य 2017 को सौंपा जाना था। इस प्रकरण में पीड़ित पक्ष ने बैंक से लोन लेकर आठ लाख 50 हजार का भुगतान कर दिया, लेकिन निर्धारित समय में फ्लैट का आधिपत्य नहीं सौंपा जा सका। पीड़ित पक्ष की मांग पर रेरा ने हाउसिंग बोर्ड को आदेश दिया कि दो महीने के भीतर फ्लैट के लिए भुगतान की गई राशि ब्याज सहित वापस की जाए।
केस-442 लाख का मकान अधूरा
पार्थिवी ग्रुप के प्रोजेक्ट पार्थिवी प्रोविन्स के एक मामले में रेरा ने मार्च में फैसला दिया कि दो महीने के भीतर बिल्डर, मकान का आधिपत्य पूरी गुणवत्ता के साथ प्रदान करेंं। पीड़ित पक्ष ने शिकायत की थी कि वर्ष-2012 में बुकिंग कराने के बाद बिल्डर को 24 महीने के भीतर यानी 2014 में मकान का आधिपत्य सौंपना था। मकान में बिजली, किचन फिटिंग, खिड़की, दरवाजे, नल कनेक्शन, पानी आदि की व्यवस्था नहीं की गई है। बार-बार बोलने के बाद भी काम नहीं हुआ।
छत्तीसगढ़ क्रेडाई के सचिव संजय रहेजा ने कहा, क्रेडाई से रजिस्टर्ड बिल्डरों के खिलाफ काफी कम शिकायतें मिल रही है। हमने क्रेडाई में अलग से उपभोक्ता फोरम बनाया है। दूसरे राज्यों के मुकाबले रेरा में होने वाली शिकायतें छत्तीसगढ़ में बहुत कम है। कोविड-19 की वजह से भी काफी कुछ स्थितियां बदली। क्रेडाई की पूरी कोशिश है कि शिकायतें कम से कम हों।
हाइलाइटरसबसे अधिक आती है इस तरह की शिकायतें1. रजिस्ट्री के बाद भी मकान और जमीन पर कब्जा नहीं देना।2. ब्रोशर में जो दिखाया गया, वैसा नहीं बना।3. प्रोजेक्ट का समय-सीमा में निर्माण नहीं होना। क्लब हाउस, गार्डन और अन्य सुविधाओं का अभाव।4. प्रोजेक्ट लांच हुआ, लेकिन बना ही नही।
5. प्रोजेक्ट में लीज डीड, नामांतरण का नहीं होना।