RJ: रामगढ़ बांध पर कृत्रिम बारिश का ड्रोन डेमो देखने उमड़ी भीड़, बारिश न होने पर लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया

जयपुर: मंगलवार को रामगढ़ बांध एक अनोखे नजारे का गवाह बना, जब यहां कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) का डेमो देखने के लिए हजारों लोग जुट गए। कंपनी ने प्रदर्शन का समय दोपहर 2 बजे तय किया था, लेकिन लोगों का उत्साह इतना था कि सुबह 10 बजे से ही आसपास के गांवों और जयपुर शहर से भीड़ पहुंचने लगी।
लोग छाता, कैमरे और मोबाइल लेकर आए और पहली बार इस तकनीक को अपनी आंखों से देखने के लिए बेताब दिखे।
भीड़ पर काबू पाने में प्रशासन के पसीने छूटे
रामगढ़ बांध की पाल और पेटे पर लोगों की इतनी भीड़ इकट्ठा हो गई कि पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। ड्रोन उड़ाने के लिए एक खास जगह तय की गई थी, जहां एंट्री नहीं थी, लेकिन भीड़ सीधे वहां पहुंच गई। हालात संभालने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक पुलिस एक तरफ भीड़ को काबू करने में लगी रही, वहीं दूसरी ओर कंपनी के इंजीनियर ड्रोन उड़ाने की कोशिश करते रहे।
बादल थे 10 हजार फीट पर, ड्रोन की सीमा 400 मीटर
पहले दो प्रयास नाकाम रहे। कंपनी के मुताबिक, ज्यादा भीड़ की वजह से जीपीएस सिग्नल में दिक्कत आई। तीसरी कोशिश में ड्रोन ने उड़ान भरी, लेकिन उसे 400 मीटर से ऊपर जाने की अनुमति नहीं थी, जबकि बारिश के लिए जरूरी बादल करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर थे। नतीजा – बारिश नहीं हो पाई।
कंपनी ने बताया कि यह कृत्रिम बारिश की प्रक्रिया करीब दो महीने तक जारी रहेगी।
ड्रोन से जुड़ी रोचक घटनाएं
पहले प्रयास में ड्रोन उड़ ही नहीं पाया। दूसरे प्रयास में थोड़ी ऊंचाई लेने के बाद ड्रोन नीचे गिरकर झाड़ियों में फंस गया। तुरंत टीम के सदस्य और पुलिसकर्मी उसे सुरक्षित बाहर लेकर आए। इस दौरान भीड़ फोटो और वीडियो लेने में जुट गई, जिससे अव्यवस्था और बढ़ गई।
तीसरी बार, कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा और स्थानीय विधायक की मौजूदगी में ड्रोन ने सफल उड़ान भरी, लेकिन बारिश फिर भी नहीं हो पाई।
भीड़ का जुनून और खतरा
जगह की कमी के चलते कई लोग पेड़ों, पहाड़ियों और पुराने भवनों की छतों पर चढ़ गए। भीड़ की संख्या क्षमता से ज्यादा थी, जिससे हादसे का खतरा बना रहा।
मंत्री भी जाम में फंसे
डेमो देखने आए लोगों की भारी संख्या के कारण यातायात व्यवस्था भी चरमरा गई। कई जगह लंबा जाम लग गया, जिसमें कृषि मंत्री खुद फंस गए और उन्हें पैदल कार्यक्रम स्थल तक पहुंचना पड़ा।






