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बिहार के छात्र कोटा में धरने पर बैठे, राज्य के 17 लाख से ज्यादा लोग दूसरे राज्यों में फंसे

देश में लॉकडाउन के चलते बिहार के 17 लाख से ज्यादा लोग दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं। राज्य सरकार ने कहा है कि फिलहाल उन्हें वापस लाना मुमकिन नहीं है। बिहार के करीब 11 हजार छात्र और छात्राएं राजस्थान के कोटा में भी फंसे हैं। अब उन्होंने घर वापसी के लिए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 

बिहार सरकार से लगातार आग्रह करने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। छात्र हॉस्टल में रहकर ही उपवास कर रहे हैं और गांधीवादी तरीके से हाथ में तख्तियां लेकर राज्य सरकार से घर बुलवाने की अपील कर रहे हैं। 

छात्रों का कहना है कि जब तक उन्हें घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं होती है उनका उपवास जारी रहेगा। बच्चों के अलावा उनके परिजन भी लगातार राज्य सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि उन्हें कोटा से वापस लाने की व्यवस्था की जाए। 


कोटा में बिहार समेत अन्य राज्यों के लगभग 22 से 25 हजार छात्र अभी भी फंसे हुए हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपील की है कि जिन राज्यों के छात्र अभी भी कोटा में फंसे हुए हैं उनकी सरकारें उन्हें घर पहुंचाने में सहयोग करें। इसको लेकर गहलोत सरकार बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सरकार से बात कर रही है। 


बिहार सरकार ने गुरुवार को हाईकोर्ट में जानकारी दी कि दूसरे राज्यों में फंसे राज्य के 17 लाख से ज्यादा लोगों को फिलहाल वापस नहीं ला सकते। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि उन लोगों को फौरी सहायता के तौर पर भोजन, राशन और रुपये दिए जा रहे हैं। 

आपदा प्रबंधक विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने दूसरे राज्यों में फंसे बिहार के लोग और उनको प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही मदद के बारे में हाईकोर्ट के निबंधक कार्यालय को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में बिहार सरकार ने बताया कि लॉकडाउन के नियमों और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। लॉकडाउन की अवधि में प्रदेश के किसी भी व्यक्ति को वापस नहीं लाया जा सकता। ऐसे लोगों को समुचित भोजन, राशन के साथ तत्काल एक-एक हजार रुपये दिए जा रहे हैं। 

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