हापुड़ के किड्स कैसल स्कूल में हैवानियत: फीस न भरने पर 6वीं के छात्र को कमरे में बंद कर पीटा

हापुड़, उत्तर प्रदेश: दोस्तों, एक ऐसी खबर सामने आई है, जो इंसानियत को शर्मसार कर देती है। बाबूगढ़ के किड्स कैसल पब्लिक स्कूल में 6वीं कक्षा के मासूम छात्र अंकुश के साथ शिक्षकों ने ऐसी बर्बरता की, जिसे सुनकर रूह कांप जाए। उसका गुनाह? बस इतना कि उसके माता-पिता स्कूल की फीस नहीं भर पाए। इसके लिए उसे कमरे में बंद करके बेरहमी से पीटा गया। आइए, इस दिल दहलाने वाली घटना के बारे में विस्तार से जानते हैं।
शिक्षा के मंदिर में मासूम पर जुल्म
बच्चे का कसूर सिर्फ इतना था कि उसके परिवार ने फीस जमा नहीं की थी। इस छोटी सी बात के लिए स्कूल के तीन शिक्षकों ने उसे इतनी क्रूर सजा दी कि सुनकर हर कोई सन्न रह जाए। पीड़ित छात्र अंकुश को कमरे में बंद किया गया और बेरहमी से उसकी पिटाई की गई। इस दौरान उसके हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। दर्द से कराहते बच्चे की हालत देखकर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा, और उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
परिजनों ने लगाई न्याय की गुहार
अंकुश के परिवार ने हापुड़ के एसपी ऑफिस पहुंचकर इंसाफ की मांग की। परिजनों का कहना है कि स्कूल के तीन शिक्षकों ने उनके बेटे को पहले कमरे में बुलाया, फिर उसके दोनों हाथ पकड़कर बेरहमी से पीटा। फीस न जमा होने की वजह से बच्चे को निशाना बनाया गया। परिजनों का गुस्सा जायज है आखिर शिक्षा के मंदिर में बच्चों के साथ ऐसी हैवानियत क्यों?
पुलिस ने शुरू की जांच, स्कूल प्रबंधन खामोश
इस मामले में अपर पुलिस अधीक्षक विनीत भटनागर ने बताया कि 6वीं कक्षा के छात्र के साथ स्कूल के शिक्षकों द्वारा मारपीट की शिकायत मिली है। इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, और पुलिस पूरी तहकीकात कर रही है। दूसरी तरफ, किड्स कैसल पब्लिक स्कूल का प्रबंधन इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। कोई जवाब नहीं दे रहा कि आखिर क्यों एक बच्चे के साथ ऐसी क्रूरता हुई।
क्या है पूरा मामला
यह शर्मनाक घटना हापुड़ के बाबूगढ़ इलाके में स्थित किड्स कैसल पब्लिक स्कूल की है। 6वीं कक्षा में पढ़ने वाला अंकुश सिर्फ एक सामान्य छात्र है, जिसके परिवार की आर्थिक स्थिति शायद ठीक नहीं थी। फीस न भर पाने की वजह से शिक्षकों ने उसे सबक सिखाने का ऐसा तरीका चुना, जो किसी को भी हिलाकर रख दे। बच्चे के साथ हुई इस बर्बरता ने स्कूलों की कार्यप्रणाली और शिक्षकों की मानसिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।






