18 साल बाद जेल से रिहा होगा अंडरवर्ल्ड डॉन अरुण गवली: सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत

मुंबई: दोस्तों, एक ऐसी खबर सामने आई है, जो मुंबई के अंडरवर्ल्ड की दुनिया में फिर से हलचल मचा सकती है। कभी मुंबई की गलियों में खौफ का पर्याय रहे अरुण गवली को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। 18 साल तक नागपुर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काटने के बाद अब गवली जल्द ही जेल से बाहर निकलने वाला है। आइए, जानते हैं इस सनसनीखेज खबर की पूरी कहानी।
क्या है पूरा मामला?
अरुण गवली, जिसे मुंबई का ‘डैडी’ भी कहा जाता था, 2007 में शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के मामले में सजा काट रहा था। 2012 में मुंबई सत्र न्यायालय ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई और 17 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके बाद गवली को नागपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। गवली ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 2019 में हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अब सुप्रीम कोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उसे जमानत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी जमानत?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह शामिल थे, ने गवली की जमानत याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने दो अहम बातों पर गौर किया:
- गवली ने 18 साल से ज्यादा समय जेल में बिता लिया है।
- उसकी उम्र अब 73 साल हो चुकी है।
इन आधारों पर कोर्ट ने गवली को निचली अदालत की शर्तों के साथ जमानत दे दी। कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई फरवरी 2026 के लिए तय की है। गवली के वकील मीर नगमान अली और हाड़कर ने इस केस में उनकी पैरवी की।
कब रिहा होगा गवली?
गवली के वकील मीर नगमान अली के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का जमानत आदेश जल्द ही मुंबई की निचली अदालत तक पहुंचेगा। इसके बाद रिहाई की औपचारिकताएं पूरी होंगी। उम्मीद है कि अगले एक-दो दिन में अरुण गवली नागपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ जाएगा।
कौन है अरुण गवली?
अरुण गवली मुंबई के डगड़ी चॉल का कुख्यात गैंगस्टर रहा है। 1980 और 1990 के दशक में वह मुंबई के अंडरवर्ल्ड में दाऊद इब्राहिम के गैंग का बड़ा प्रतिद्वंद्वी था। गवली ने बाद में अपराध की दुनिया को छोड़कर राजनीति में कदम रखा और 2004 में मुंबई के चिंचपोकली से विधायक भी चुना गया। उसने अखिल भारतीय सेना नामक राजनीतिक दल भी बनाया। लेकिन 2007 के हत्याकांड ने उसे फिर सुर्खियों में ला दिया।
पहले भी रिहाई की कोशिश
इससे पहले अप्रैल 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने गवली को समय से पहले रिहाई का आदेश दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जून 2024 में इस पर रोक लगा दी थी। अब 18 साल बाद गवली को जमानत मिलने से उसके समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं कुछ लोग इसे मुंबई की सियासत और अंडरवर्ल्ड के लिए नया मोड़ मान रहे हैं।






