Sagaun Root-Shoot Method: 1 एकड़ में सागौन की रूट-शूट विधि से कमाए लाखो-करोड़ो, रूट-शूट विधि की बड़ी डिमांड, ऐसे करें तैयार। मध्य प्रदेश के शहडोल संभाग को प्रकृति का वरदान मिला हुआ है. घने जंगल, वन्यप्राणी, नदियां, तालाब, झरने, पहाड़ियां यहां का मौसम सब कुछ इस संभाग को अलग बनाते हैं.
संभाग का उमरिया जिला तो बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के चलते देश दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखता ही है. इसके साथ ही अब ये जिला सागौन की नर्सरी को लेकर भी अपनी एक खास पहचान बना रहा है. यहां तैयार किए गए सागौन की नर्सरी की डिमांड बहुत ज्यादा है. खासकर यहां के रूट शूट बहुत फेमस हैं, जिससे इस जिले को अब एक अलग पहचान भी मिल रही है.
Sagaun Root-Shoot Method: सागौन के रूट-शूट की गजब डिमांड
वन विकास निगम उमरिया ने इस बार लगभग 15 लाख रुपए के सागौन के पौधे रूट-शूट और पॉली पॉट तकनीक से तैयार किए हैं. जिसकी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अच्छी खासी डिमांड है. वन विकास निगम उमरिया के डीएम अमित पटौदी ने बताया, “5.62 लाख रुपए के सागौन के रूट शूट और करीब 70 हजार पॉली पॉट तकनीक से तैयार सागौन के पौधे उमरिया जिले में लगाने के लिए भेजे गए हैं. 20 जून से 13 जुलाई के बीच में मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में 17 हजार, इसके अलावा विंध्य क्षेत्र के रीवा और सीधी जिले में भी करीब 7.40 लाख सागौन के रूट शूट भेजे गए हैं.”
Sagaun Root-Shoot Method: रूट-शूट तकनीक से कैसे तैयार करते हैं सागौन
किसी भी पौधे का जंगल तैयार करने के लिए जरूरी होता है कि अच्छी क्वालिटी के पौधे होने चाहिए. सागौन के पौधे तैयार करना इतना सरल काम नहीं होता है. उसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है और एक तकनीक के तहत ही उसके पौधे तैयार होते हैं. सागौन के पौधे लगाने के लिए सबसे फेमस तकनीक रूट-शूट है. इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले बेड़ तैयार किए जाते हैं. इसके बाद इनमें सागौन के बीजों की बुवाई की जाती है फिर उसकी देखरेख की जाती है.
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करीब दो साल तक उसकी बारीकी से देखरेख करनी पड़ती है. दो वर्षों के बाद वो बीज एक स्वस्थ्य पौधा बन जाता है. इसके बाद इन स्वस्थ पौधों को उखाड़ लिया जाता है फिर तेज धार वाले औजार से उसकी कटाई की जाती है. ताकी उसमें कटाई के दौरान जड़ छिले नहीं. उसमें रूट और शूट दोनों होना चाहिए. रूट का मतलब जड़ और शूट का मतलब तना होता है.
Sagaun Root-Shoot Method: क्या होता है क्रोबार?, कैसे लगाता है ये रूट-शूट?
जानकार बताते हैं कि, सागौन के रूट शूट को लगाने के लिए क्रोबार औजार का उपयोग किया जाता है. क्रोबार औजार एक लोहे की शबरीनुमा सरिया होती है, जिसमें 22 सेंटीमीटर पर एक क्रॉस बार लगा होता है. क्रोबार की सहायता से ही उस रूट शूट को टाइट किया जाता है. रूट शूट को टाइट करने के लिए क्रोबार से जहां पर हम रूट शूट लगाते हैं. उससे लगभग 10 सेंटीमीटर की दूरी पर क्रोबार को दबाकर रूट शूट की ओर घुमाया जाता है, जिससे वो रूट शूट टाइट हो जाता है. इसी तरह से रूट शूट को जमीन पर लगाया जाता है, जिससे सागौन के अच्छे पौधे तैयार हो जाते हैं, जो आगे चलकर एक बड़ा वृक्ष बनता है.
Sagaun Root-Shoot Method: पौधे तैयार करने की पॉली पॉट विधि
सागौन के पौधे तैयार करने की रूट शूट के अलावा एक तकनीक पॉली पॉट विधि भी है. इसमें जैसे की नाम से ही स्पष्ट है पॉली पॉट मतलब पॉली बैग में तैयार किए गए पौधों को पॉली पॉट कहा जाता है. इसमें अलग-अलग साइज की पॉलीथीन आती है. उसमें मिट्टी, खाद, आदि भरकर के बीज लगाए जाते हैं. या फिर पहले बेड़ में पौधा तैयार करके पॉली पॉट में रोपित कर दिए जाते हैं फिर उनकी देखरेख की जाती है. इन पौधों को लगाने के लिए बरसात पूर्व गड्डों की खुदाई कर ली जाती है और उसमें ये पौधे लगाए जाते हैं.
Sagaun Root-Shoot Method: पौधे कब और कहां लगाएं?
सागौन के पौधों को बरसात के मौसम में पहली बारिश के बाद लगाना बिल्कुल सही होता है. जब जमीन गर्म हो, तभी इसे लगा देना चाहिए. सागौन के पौधे लगाने से पहले इस बात का ख्याल रखें कि जहां भी लगाएं फिर चाहे रूट शूट लगाएं या फिर पॉली पॉट से तैयार किए गए पौधे लगाएं. उस जगह पर पानी न रुकता हो. पानी निकासी की बेहतर व्यवस्था हो. फिर समय-समय पर खाद डालते रहें और उसकी देखरेख करते रहें.
Sagaun Root-Shoot Method: क्यों है बहुमूल्य? सागौन
सागौन का पौधा बहुत ही बहुमूल्य माना जाता है. एक बार अगर आपने सागौन के कुछ पौधे तैयार कर लिए मतलब आपने पैसों का एक खजाना तैयार कर लिया है. क्योंकि ये इमारती लकड़ी मानी जाती है. इससे कई तरह की बहुमूल्य चीजें बनाई जाती हैं. बाजार में सागौन के लकड़ियों की अच्छी खासी डिमांड है.
Sagaun Root-Shoot Method: सागौन कहीं भी लग जाता है?
सागौन के पौधों को तैयार करना बहुत आसान है. पिछले कुछ सालों में सागौन के कई पौधे उमरिया जिले में लगाए गए हैं और वो तेजी से ग्रोथ भी किए हैं. मतलब शहडोल संभाग का एटमॉस्फियर सागौन के जंगल के लिए बहुत बेहतरीन है. एक्सपर्ट बताते हैं कि “सागौन का पौधा एक तरह से कह सकते हैं कि ये बेशरम प्रजाति का है. कहीं भी आसानी से लग जाता है. बड़ी बात यह है कि इसे मवेशी भी नहीं खाते हैं. सागौन का पेड़ 80 से 100 फिट तक लंबा हो सकता है. माना जाता है कि 60 साल में ये पौधा मैच्योर होता है. हलांकि, सागौन का पौधा 25 साल बाद इमारती उपयोग के लायक हो जाता है.”
Sagaun Root-Shoot Method: सागौन में उत्पादन में नंबर-1 है मध्य प्रदेश
सागौन के जंगलों के मामले में देश में मध्य प्रदेश नंबर-1 है. यहां के जंगलों में सागौन के पेड़ बहुतायत में पाए जाते हैं. इसके अलावा देश में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में भी सागौन के काफी जंगल पाए जाते हैं. मध्य प्रदेश में सागौन के जंगलों की बात करें तो बैतूल, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, सिवनी जैसे जगहों पर सागौन के जंगल पाए जाते हैं.
Sagaun Root-Shoot Method: उमरिया में भी सागौन के जंगल
इसके अलावा अब उमरिया जिले में भी सागौन के पौधों को ज्यादा से ज्यादा लगवाया जा रहा है. हलांकि यहां पर प्राक्रतिक तौर पर साल के जंगल सबसे ज्यादा हैं, लेकिन अब सागौन भी तैयार किया जा रहा है. प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले सागौन के जंगलों में आधा हिस्सा तो सिर्फ म्यामार में है. बाकी अब तो अलग-अलग विधि से इसे पूरी दुनिया में लगाया जा रहा है.