Organic Farming 2025: जैविक केंचुआ खाद बनाने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी, जानिए केंचुआ खाद बनाने की विधि

Organic Farming 2025: जैविक केंचुआ खाद बनाने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी, जानिए केंचुआ खाद बनाने की विधि कृषि में रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग फसलों को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए जैविक खेती करना लाभदायक होता है। भारतीय किसानों को भी जैविक खेती के महत्व को समझना बहुत जरूरी है। सरकार की वर्मी कम्पोस्ट इकाई सब्सिडी योजना के तहत किसानों को जैविक खेती करने पर सब्सिडी मिलती है। यह योजना विभिन्न जिलों में चल रही है। आइए ट्रैक्टर गुरु के माध्यम से जानते हैं कि यह योजना क्या है और कैसे यह किसानों के लिए फायदेमंद है।
जैविक खेती क्या होती है? What is organic farming?
जैविक खेती क्या होती है? जैविक खेती कृषि की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया जाता। इसमें प्राकृतिक चीज़ें जैसे गोबर की खाद, जीवामृत आदि का उपयोग किया जाता है। जैविक खेती पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाती। खेती की इस प्रक्रिया को सबसे अच्छी प्रक्रिया माना जाता है।
केंचुआ खाद योजना क्या है? What is earthworm compost scheme?
केंचुआ खाद योजना क्या है? जैविक खेती में सबसे ज़्यादा मांग गोबर और केंचुआ खाद की होती है। केंचुआ खाद यानी वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए यह योजना चल रही है, जिसमें किसानों को दो प्रकार की यूनिट्स के लिए सब्सिडी दी जाती है:
RCC (Reinforced Cement Concrete) वर्मी कम्पोस्ट यूनिट
- आकार : 30 x 8 x 2.5 फीट
- सब्सिडी : कुल निर्माण लागत का 50% या अधिकतम ₹50,000 प्रति यूनिट
- विशेषता : यह उन किसानों के लिए उपयुक्त है जो बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार करना चाहते हैं।
HDPE वर्मी बेड यूनिट
- आकार : 12 फीट x 4 फीट x 2 फीट
- सब्सिडी : कुल लागत का 50% या अधिकतम ₹8,000 प्रति यूनिट
- विशेषता : यह उन किसानों के लिए उपयुक्त है जो कम लागत में शुरुआत कर रहे हैं।
केंचुआ खाद बनाने की विधि
केंचुआ खाद बनाने की विधि बहुत ही सरल है:
- सबसे पहले एक महीने पुराना गोबर लें, क्योंकि ताजा गोबर अत्यधिक गर्मी उत्पन्न करता है जिससे केंचुए मर सकते हैं।
- फिर भूसे के छोटे-छोटे टुकड़े नीचे बिछाएं और ऊपर से घास या हल्की मिट्टी डालें।
- उसके बाद हल्की सिंचाई करें और गोबर व घास की परतें एक के ऊपर एक डालकर तीन परतें बनाएं। तीसरी परत के बाद केंचुओं को छोड़ दें।
- फिर जूट के बोरे से ढंककर नियमित हल्की सिंचाई करें।
- करीब 45 दिन में आपकी केंचुआ खाद तैयार हो जाएगी।
खेत में वर्मीकंपोस्ट डालने के लिए ये उपकरण है उपयोगी
खेत में वर्मीकंपोस्ट डालने के लिए ये उपकरण है उपयोगी खेत में वर्मीकंपोस्ट का उपयोग कई कृषि उपकरणों से किया जा सकता है, जिनमें फावड़ा, कल्टीवेटर, और ट्रैक्टर-माउंटेड स्प्रेडर शामिल हैं।
- फावड़ा: वर्मीकंपोस्ट को खेत में फैलाने के लिए फावड़ा एक सरल और प्रभावी उपकरण है।
- कल्टीवेटर: कल्टीवेटर का उपयोग वर्मीकंपोस्ट को मिट्टी में मिलाने के लिए किया जा सकता है, जिससे यह पौधों की जड़ों तक आसानी से पहुंच सके।
- ट्रैक्टर-माउंटेड स्प्रेडर: बड़े खेतों के लिए, ट्रैक्टर-माउंटेड स्प्रेडर एक उपकरण है जो वर्मीकंपोस्ट को समान रूप से वितरित करता है।
- हाथ से फैलाना : छोटे क्षेत्रों या क्यारियों में, वर्मीकंपोस्ट को हाथ से भी फैलाया जा सकता है।
वर्मीकम्पोस्ट इकाई सब्सिडी योजना की आवेदन प्रक्रिया
वर्मीकम्पोस्ट इकाई सब्सिडी योजना से जुड़ने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना पड़ेगा:
- सबसे पहले राजकिसान पोर्टल (https://rajkisan.rajasthan.gov.in/) पर जाकर एसएसओ आईडी या जनआधार आईडी का उपयोग करके लॉगिन करें।
- यदि आप नए यूजर हैं तो “Registration” विकल्प पर क्लिक करें और रजिस्टर करें।
- रजिस्टर करने के बाद SSO पोर्टल में अपनी किसान प्रोफाइल बनाएं।
- फिर डैशबोर्ड में उपलब्ध “RAJ-KISAN” विकल्प पर क्लिक करें।
- “Farmer” सेक्शन में जाएं और “Application Entry Request” पर क्लिक करें।
- वहां अपनी जन आधार ID और आधार कार्ड ID दर्ज करें।
- उसके बाद सभी आवश्यक दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करें।
- दस्तावेज अपलोड होने के बाद आवेदन फॉर्म को सबमिट करें।
इस प्रक्रिया में ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम भी उपलब्ध है, जिससे किसान अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं।





