Independence Day 2025: 15 अगस्त को क्या हुआ था और 15 august को ही क्यों स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है

15 august का नाम सुनते ही हर भारतीय का दिल जोश और गर्व से भर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी पहले 30 जून 1948 को मिलने वाली थी? फिर हालात ऐसे बने कि ये तारीख बदलकर 15 अगस्त 1947 हो गई। इसके पीछे न सिर्फ राजनीतिक रणनीतियां थीं, बल्कि विश्व इतिहास की एक बड़ी घटना ने भी अहम रोल निभाया। आइए, आसान और मजेदार अंदाज में जानते हैं कि कैसे बदली भारत की आजादी की तारीख और क्यों लॉर्ड माउंटबेटन ने चुना 15 अगस्त का दिन!
15 august पूर्ण स्वराज का सपना
बात 1929 की है, जब लाहौर में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पूर्ण स्वराज का नारा बुलंद किया। उस समय महात्मा गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना, और तेज बहादुर सप्रू जैसे नेताओं ने ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड इरविन से भारत को पूरी आजादी देने की मांग की। लेकिन ब्रिटिश सरकार सिर्फ डोमिनियन स्टेटस देने को तैयार थी, यानी सीमित स्वायत्तता, लेकिन ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा बने रहना। ये बात हमारे नेताओं को मंजूर नहीं थी। उन्होंने ठान लिया कि अब सिर्फ पूर्ण स्वतंत्रता चाहिए। इसके बाद 1930 से 1947 तक हर साल 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया। ये वो दौर था जब भारत की जनता में आजादी की आग भड़क रही थी
दूसरा विश्व युद्ध: ब्रिटेन की कमजोरी, भारत की ताकत
दूसरा विश्व युद्ध (1939-1945) ने ब्रिटेन को आर्थिक और सैन्य रूप से तोड़ दिया। युद्ध के बाद उनके पास न तो भारत को कंट्रोल करने की ताकत बची थी, न ही वैश्विक समर्थन। 1946 में ब्रिटिश संसद ने ऐलान किया कि 30 जून 1948 तक भारत को आजाद कर दिया जाएगा। लॉर्ड माउंटबेटन को आखिरी वायसराय बनाकर भेजा गया, जिन्हें सत्ता हस्तांतरण की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन भारत की जनता और स्वतंत्रता सेनानियों को इतना लंबा इंतजार मंजूर नहीं था। देश में बढ़ते असंतोष और हिंसा की आशंका को देखते हुए माउंटबेटन ने फैसला लिया कि आजादी को जल्दी देना होगा।
माउंटबेटन प्लान: भारत-पाकिस्तान का बंटवारा और आजादी
3 जून 1947 को माउंटबेटन प्लान सामने आया, जिसने भारत और पाकिस्तान के बंटवारे का रास्ता साफ किया। इसके तहत 15 अगस्त 1947 को सत्ता हस्तांतरण का ऐलान हुआ। ब्रिटिश संसद ने 5 जुलाई 1947 को Indian Independence Act 1947 पास किया, जिसने भारत को पूर्ण स्वतंत्रता दी और ब्रिटिश सम्राट का भारत पर अधिकार खत्म कर दिया। पहले गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी ने कहा था, “अगर माउंटबेटन 1948 तक इंतजार करते, तो शायद हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता ही न बचती।” यानी, हालात इतने बिगड़ रहे थे कि जल्दी आजादी देना जरूरी था।
15 अगस्त क्यों? जापान के आत्मसमर्पण से कनेक्शन
लॉर्ड माउंटबेटन ने 15 अगस्त की तारीख यूं ही नहीं चुनी। इसके पीछे एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक वजह थी। 15 अगस्त 1945 को जापान ने दूसरे विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण किया था, जब हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गए। जापान के सम्राट हिरोहितो ने उसी दिन अपने देश को संबोधित कर युद्ध खत्म करने का ऐलान किया। माउंटबेटन ने अपनी किताब Freedom at Midnight में लिखा, मैंने 15 अगस्त इसलिए चुना क्योंकि ये जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी सालगिरह थी। मैं दिखाना चाहता था कि सत्ता हस्तांतरण मेरे कंट्रोल में है। इस तारीख ने भारत की आजादी को वैश्विक स्तर पर एक यादगार पल बना दिया।
पाकिस्तान का 14 अगस्त: रमजान और लॉजिस्टिक्स की कहानी
हालांकि Indian Independence Act 1947 के मुताबिक भारत और पाकिस्तान दोनों को 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को आजादी मिली थी, लेकिन पाकिस्तान ने 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस चुना। इसके पीछे दो वजहें थीं:
- धार्मिक महत्व: 14 अगस्त 1947 को रमजान का आखिरी जुम्मा था, जो मुस्लिम समुदाय के लिए पवित्र माना जाता है।
- लॉजिस्टिक्स: माउंटबेटन को दोनों देशों में सत्ता हस्तांतरण के कार्यक्रमों में शामिल होना था। वो 14 अगस्त को कराची गए और 15 अगस्त को दिल्ली में थे। कराची में उन्होंने 13 अगस्त को कहा, “कल से पाकिस्तान की सत्ता आपके हाथ में होगी,” जिसके बाद पाकिस्तान ने 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में चुना।
आजादी के साथ आया दर्दनाक बंटवारा
15 अगस्त 1947 को भारत आजाद तो हुआ, लेकिन बंटवारे का दर्द भी साथ लाया। लाखों लोग बेघर हुए, हिंसा में हजारों की जान गई। फिर भी, ये दिन हमारे लिए गर्व और जिम्मेदारी का प्रतीक है। 2025 में हम 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, जो हमें याद दिलाता है कि आजादी की कीमत क्या थी और इसे संजोकर रखना कितना जरूरी है। तो इस 15 अगस्त, तिरंगा लहराएं, राष्ट्रगान गाएं, और उन शहीदों को सलाम करें जिनके बलिदान ने हमें ये आजादी दी। चलिए, देश को और मजबूत बनाने का वादा करें!






