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संसद में हंगामा: कंगना रनौत ने विपक्ष पर साधा निशाना, कहा अमित शाह पर फेंके कागज और पत्थर’

नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार, 20 अगस्त 2025 को ऐसा बवाल मचा कि हर कोई हैरान रह गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गए एक विधेयक को लेकर विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। बिल की कॉपियां फाड़कर गृह मंत्री की ओर फेंकी गईं और कथित तौर पर पत्थर तक फेंके गए। इस घटना पर मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला और इसे शर्मनाक बताया। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

संसद में क्या हुआ?

20 अगस्त 2025 को लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया। इस विधेयक में प्रावधान है कि अगर कोई प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, या अन्य मंत्री 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उसे इस्तीफा देना होगा या उसका पद स्वतः निरस्त हो जाएगा। इस बिल को पेश करते ही विपक्षी सांसद भड़क गए।

विपक्षी नेताओं ने न सिर्फ हंगामा किया, बल्कि बिल की कॉपियां फाड़कर गृह मंत्री की ओर फेंक दीं। कंगना रनौत ने दावा किया कि कुछ सांसदों ने तो पत्थर तक फेंके। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री का माइक हटाने की कोशिश भी की। अमित शाह ने 20 अगस्त 2025 को लोकसभा में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पेश किया, जैसा कि उनके आधिकारिक ‘X’ पोस्ट और समाचार स्रोतों से पुष्ट है। हालांकि, पत्थर फेंकने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।

कंगना रनौत ने क्या कहा?

मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने इस हंगामे पर कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्ष की हरकतों को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा, “संसद में जो कुछ हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार कर देगा। जब गृह मंत्री अमित शाह विधेयक पेश कर रहे थे, तब विपक्षी सांसदों ने उनका माइक छीनने की कोशिश की। बिल की कॉपियां फाड़कर उनके मुंह पर फेंकी गईं। इतना ही नहीं, कुछ लोग तो पत्थर लेकर आए और गृह मंत्री पर फेंके।”

कंगना ने आगे कहा, “विपक्षी सांसदों का यह हिंसक व्यवहार अस्वीकार्य है। हमारे पार्टी के नेताओं ने इस दौरान बहुत संयम दिखाया, लेकिन संसद में ऐसी हरकतें कब तक चलेंगी? यह चिंता का विषय है।” उन्होंने विपक्ष के व्यवहार को लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया।

विपक्ष का हंगामा और आलोचना

जैसे ही अमित शाह ने विधेयक पेश किया, विपक्षी सांसदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा, “यह विधेयक राज्य की संस्थाओं के दुरुपयोग का रास्ता खोलता है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही ऐसी मनमानी पर सवाल उठा चुका है।” विपक्ष ने इस बिल को वापस लेने की मांग की और इसे सत्तारूढ़ दल की साजिश करार दिया। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और बिल की कॉपियां फाड़कर विरोध जताया। इस हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही में व्यवधान पैदा हुआ

क्यों अहम है यह विधेयक?

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 का मकसद राजनीति में नैतिकता को बढ़ावा देना है। अमित शाह ने ‘X’ पर कहा कि यह बिल राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस विधेयक के तहत कोई भी बड़ा पदाधिकारी अगर 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उसे पद छोड़ना होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम जनता के भरोसे को मजबूत करेगा, लेकिन विपक्ष इसे सत्ता के दुरुपयोग का हथियार बता रहा है।

क्या है आगे की राह?

यह घटना संसद में बढ़ती तल्खी और विपक्ष-सत्ता पक्ष के बीच तनाव को दर्शाती है। कंगना रनौत ने जहां विपक्ष के व्यवहार को शर्मनाक बताया, वहीं विपक्ष का कहना है कि यह बिल लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करेगा। इस विधेयक पर चर्चा और संसद की कार्यवाही आगे क्या मोड़ लेगी, यह देखना बाकी है।