ICSSR का CSDS पर सख्त एक्शन: संजय कुमार पर FIR, 7 दिन में फंडिंग स्रोत बताने का नोटिस

पानीपत, हरियाणा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) और इसके सह-निदेशक संजय कुमार पर भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) ने कड़ा रुख अपनाया है। 20 अगस्त 2025 को ICSSR ने CSDS को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव और निर्वाचन आयोग के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़े डेटा के लिए धन स्रोतों का खुलासा करने को कहा गया। साथ ही, नागपुर और नासिक पुलिस ने संजय कुमार के खिलाफ गलत जानकारी फैलाने के लिए FIR दर्ज की है। इस मामले ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। आइए, इसे आसान और रोचक अंदाज में समझते हैं!
ICSSR ने क्यों दिखाई सख्ती
ICSSR ने CSDS पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिषद का कहना है कि CSDS ने जानबूझकर डेटा में हेरफेर किया और निर्वाचन आयोग की साख को कमजोर करने की कोशिश की। संजय कुमार, जो CSDS के लोकनीति कार्यक्रम के सह-निदेशक हैं, ने 17 अगस्त 2025 को एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया था कि महाराष्ट्र के रामटेक और देवलाली में 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच मतदाताओं की संख्या में 36-38% की कमी आई। इस डेटा को कांग्रेस के नेताओं, जैसे राहुल गांधी और पवन खेड़ा, ने वोट चोरी के आरोपों को हवा देने के लिए इस्तेमाल किया।
लेकिन, संजय कुमार ने बाद में माफी मांगते हुए पोस्ट हटा लिया और कहा कि उनकी टीम ने गलत डेटा (नासिक वेस्ट और हिंगना) की तुलना की थी। एक्स पर एक यूजर ने लिखा, “CSDS का डेटा गलत निकला, फिर भी विपक्ष ने इसे हथियार बनाया। अब ICSSR की कार्रवाई सही है
ICSSR के आरोप: अनियमितताओं का अंबार
ICSSR ने CSDS पर कई गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है:
- UGC नियमों का उल्लंघन: संकाय नियुक्तियों में गड़बड़ी।
- शासी निकाय में पारदर्शिता की कमी: अध्यक्ष का चुनाव न कराना।
- विदेशी फंडिंग का हिसाब न देना: FCRA नियमों के तहत प्राप्त धन का विवरण जमा न करना।
- HRA घोटाला: सरकारी आवास में रहने वाले कर्मचारियों को गलत तरीके से हाउस रेंट अलाउंस देना।
- CAG ऑडिट की अनदेखी: CSDS के खातों का CAG/AG द्वारा ऑडिट न कराना।
ICSSR ने इसे अनुदान नियमों का घोर उल्लंघन बताया और CSDS को 7 दिन के अंदर जवाब देने को कहा है। जवाब न मिलने पर अनुदान रद्द करने या अन्य सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। एक्स पर एक यूजर ने लिखा, “CSDS को फंडिंग का हिसाब देना होगा। ICSSR का ये कदम स्वागत योग्य है
नागपुर और नासिक में FIR: संजय कुमार पर शिकंजा
नागपुर और नासिक पुलिस ने संजय कुमार के खिलाफ FIR दर्ज की है। नागपुर ग्रामीण पुलिस के SP हर्ष पोद्दार ने बताया कि रामटेक तहसीलदार की शिकायत और जिला निर्वाचन अधिकारी के पत्र के आधार पर यह कार्रवाई हुई। FIR में भ्रामक जानकारी फैलाने, सार्वजनिक शरारत, और जालसाजी की धाराएं लगाई गई हैं (BNS धारा 175, 353(1)(b), 212, 340) नासिक जिला निर्वाचन अधिकारी ने भी एक्स पर पुष्टि की कि संजय कुमार ने देवलाली के मतदाता डेटा पर गलत जानकारी दी।
क्या है पूरा विवाद?
- संजय कुमार का दावा: 17 अगस्त को संजय ने दावा किया कि रामटेक में 38.4% और देवलाली में 36.8% मतदाता कम हुए। साथ ही, नासिक वेस्ट और हिंगना में 43-47% मतदाता बढ़े।
- विपक्ष का हंगामा: कांग्रेस ने इसे वोट चोरी का सबूत बताया और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए।
- माफी और खंडन: संजय ने 19 अगस्त को माफी मांगी, कहा कि उनकी टीम ने गलत डेटा की तुलना की। ECI डेटा के मुताबिक, महाराष्ट्र में 9.23 करोड़ (मार्च 2024) से 9.63 करोड़ (अक्टूबर 2024) मतदाता हुए, यानी 40 लाख की बढ़ोतरी।
- BJP का पलटवार: अमित मालवीया ने एक्स पर लिखा, “CSDS का डेटा गलत था, फिर भी राहुल गांधी ने इसे फैलाया। उन्हें माफी मांगनी चाहिए!”
CSDS का जवाब क्या होगा?
CSDS के पास अब 7 दिन हैं, जिसमें उसे ICSSR के सवालों का जवाब देना है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो फंडिंग रद्द होने का खतरा है। साथ ही, संजय कुमार को FIR के चलते पुलिस जांच का सामना करना पड़ सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, CSDS पहले भी कई शिकायतों के बावजूद कार्रवाई से बचता रहा है, लेकिन इस बार ICSSR का रुख सख्त है।
- तारीख: 20 अगस्त 2025, बुधवार।
- स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, न्यूज18, इंडिया टुडे, और ICSSR व नासिक DEO के एक्स पोस्ट्स।
- पुष्टि: ICSSR ने X पर नोटिस की पुष्टि की। नागपुर और नासिक पुलिस ने FIR की पुष्टि की। ECI डेटा से संजय कुमार का दावा गलत साबित हुआ।
- विवाद: कुछ लोग इसे सियासी साजिश मान रहे हैं, लेकिन ECI और ICSSR ने इसे डेटा हेरफेर और संवैधानिक संस्था पर हमला बताया।
ICSSR का CSDS और संजय कुमार पर यह एक्शन एक बड़ा सवाल उठाता है: क्या अनुसंधान संस्थानों की जवाबदेही तय होनी चाहिए? संजय कुमार की गलती और कांग्रेस के आरोपों ने निर्वाचन आयोग की साख पर सवाल उठाए, लेकिन ECI डेटा ने सच्चाई सामने ला दी। अब CSDS के जवाब और पुलिस जांच पर सबकी नजर है। एक्स पर यूजर्स कह रहे हैं, “CSDS को पारदर्शिता दिखानी होगी, नहीं तो फंडिंग खतरे में है! #ElectionData” क्या आपको लगता है कि इस मामले में और सख्ती बरतनी चाहिए






