कुबेरेश्वर धाम विवाद: पंडित प्रदीप मिश्रा की बढ़ी मुश्किलें, कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में स्थित कुबेरेश्वर धाम के प्रमुख कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा और उनकी विटलेश सेवा समिति की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इंदौर के एक वकील प्रकाश यादव ने कुबेरेश्वर धाम में हाल ही में हुए कार्यक्रमों में अव्यवस्था और सात लोगों की मौत के मामले में सीहोर जिला न्यायालय में याचिका दायर की है। कोर्ट ने इस मामले में मंडी थाना पुलिस को जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं, और अगली सुनवाई के लिए 13 सितंबर 2025 की तारीख तय की है। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, “कुबेरेश्वर धाम में इतनी बड़ी लापरवाही? अब कोर्ट सख्ती दिखाएगा!” आइए, इस मामले को आसान और रोचक अंदाज में समझते हैं।
क्या है पूरा मामला?
बीते अगस्त में कुबेरेश्वर धाम में पंडित प्रदीप मिश्रा के नेतृत्व में कांवड़ यात्रा और रुद्राक्ष वितरण का भव्य आयोजन हुआ था। इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु सीहोर पहुंचे थे। लेकिन भारी भीड़ और कथित अव्यवस्था के चलते सात लोगों की मौत हो गई। खबरों के मुताबिक, दो महिलाओं की मौत भगदड़ में दबने से हुई, जबकि बाकी पांच लोगों की मौत स्वास्थ्य कारणों और उमस भरी गर्मी की वजह से बताई गई। इस आयोजन के दौरान इंदौर-भोपाल हाईवे पर 18 घंटे तक लंबा जाम भी लगा, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
वकील प्रकाश यादव ने उठाया कदम
इंदौर के वकील प्रकाश यादव ने इस हादसे को गंभीरता से लिया और सीहोर के मंडी थाना में शिकायत दर्ज की। लेकिन जब पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तो उन्होंने सीहोर जिला न्यायालय का रुख किया। उनकी याचिका में पंडित प्रदीप मिश्रा और विटलेश सेवा समिति के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज करने की मांग की गई है। प्रकाश यादव का कहना है कि इतने बड़े आयोजन में भीड़ प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते यह हादसा हुआ। कोर्ट ने अब मंडी थाना पुलिस को जांच कर 13 सितंबर तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
पुलिस ने की थी आंशिक कार्रवाई
इस मामले में पुलिस ने पहले केवल आठ डीजे संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिन्होंने बिना अनुमति के तेज आवाज में डीजे बजाकर यातायात और भीड़ को प्रभावित किया। डीजे जब्त किए गए और मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत केस दर्ज किए गए। लेकिन आयोजकों पर कोई बड़ी कार्रवाई न होने से कई सवाल उठ रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “सिर्फ डीजे वालों पर कार्रवाई? असली जिम्मेदार तो आयोजक हैं!”
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस छेड़ दी। पूर्व मंत्री कुसुम महदेले ने पंडित प्रदीप मिश्रा को रुद्राक्ष वितरण बंद करने की सलाह दी और कहा, “धर्म के नाम पर लोगों को उन्मादी न बनाएं, ज्ञान बांटें।” वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आयोजकों के खिलाफ एफआईआर की मांग की। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने भी इस मामले में संज्ञान लिया और प्रशासन से 15 दिनों में जवाब मांगा था।
- तारीख और घटना: अगस्त 2025 में कुबेरेश्वर धाम में कांवड़ यात्रा और रुद्राक्ष वितरण के दौरान सात लोगों की मौत। दो महिलाओं की मौत भगदड़ में, बाकी स्वास्थ्य कारणों से।
- याचिका: इंदौर के वकील प्रकाश यादव ने सीहोर जिला न्यायालय में याचिका दायर की। कोर्ट ने 13 सितंबर 2025 को अगली सुनवाई तय की।
- पुलिस कार्रवाई: आठ डीजे संचालकों पर मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत केस दर्ज। आयोजकों पर अभी तक कोई बड़ा एक्शन नहीं।
- स्रोत: लाइव हिंदुस्तान, आज तक, नई दुनिया, दैनिक भास्कर, पत्रिका न्यूज।
- विवाद: आयोजकों पर कार्रवाई न होने से सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही मानते हैं, जबकि कुछ इसे श्रद्धा का मामला बता रहे हैं।
- अस्वीकरण: यह जानकारी समाचार स्रोतों और सोशल मीडिया पर उपलब्ध डेटा पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष के लिए कोर्ट की सुनवाई का इंतजार करें।
कुबेरेश्वर धाम में हुए हादसे ने न केवल सीहोर, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में हलचल मचा दी है। पंडित प्रदीप मिश्रा और विटलेश सेवा समिति पर कोर्ट की नजर है, और 13 सितंबर को होने वाली सुनवाई इस मामले में नया मोड़ ला सकती है। क्या इस हादसे के लिए आयोजकों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा, या यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना मानी जाएगी? जवाब कोर्ट के फैसले से मिलेगा






