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भारत को मिला नया खजाना: चीन की चुंबक बादशाहत को टक्कर, बदल सकती है वैश्विक ताकत की तस्वीर

रेयर अर्थ मिनरल् नाम सुनते ही लगता है, जैसे कोई अनमोल खजाना हो। और सचमुच, ये 17 धातुएं आज दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी हैं। स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक कार, विंड टर्बाइन से लेकर मिसाइल सिस्टम तक, हर आधुनिक टेक्नोलॉजी का दिल इन्हीं मिनरल्स से धड़कता है। लेकिन इस खजाने पर कब्जा जमाए बैठा है चीन, जो इसे अपने हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। जिस देश से रिश्ते खराब, उसकी सप्लाई रोक दो! नतीजा? स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन और हाई-टेक इंडस्ट्री ठप! लेकिन अब अच्छी खबर ये है कि भारत इस खेल में बड़ा खिलाड़ी बनने की राह पर है, क्योंकि हमारे पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ रिजर्व है। आइए, इस कहानी को मजेदार और आसान अंदाज में समझते हैं।

रेयर अर्थ मिनरल्स: ये हैं क्या?
रेयर अर्थ मिनरल्स 17 खास धातुओं का समूह हैं, जैसे नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम, और येट्रियम। ये धरती के गर्भ में दबे होते हैं, लेकिन इन्हें निकालना और रिफाइन करना टेढ़ी खीर है। ये कोई नई खोज नहीं हैं, लेकिन पिछले कुछ दशकों में इनकी वैल्यू आसमान छूने लगी। क्यों? क्योंकि ये सुपर मैगनेट बनाते हैं, जो स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक कार, टीवी स्क्रीन, हवाई जहाज, और रिन्यूएबल एनर्जी डिवाइसेज का आधार हैं। बिना इनके, टेस्ला जैसी इलेक्ट्रिक कारें बनाना असंभव है। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “चीन के बिना स्मार्टफोन और ईवी सपने में भी नहीं!”

चीन की बादशाहत: कैसे बना सुपरपावर?
चीन ने 30-40 साल पहले भविष्य की ताकत को भांप लिया था। उसने अपनी खदानों को खोला, रिफाइनिंग प्लांट्स लगाए, और मैगनेट बनाने की फैक्ट्रियां खड़ी कीं। आज दुनिया का 70% रेयर अर्थ प्रोडक्शन और 90% रिफाइनिंग चीन के कब्जे में है। इतना ही नहीं, उसने म्यांमार, अफ्रीका, और यहां तक कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान में भी खदानों पर कब्जा जमाया। जब अमेरिका और बाकी देश सस्ते चीनी माल पर निर्भर हो गए, तब चीन ने सप्लाई रोककर सबका टेंटुआ दबा दिया। 2010 में जापान और हाल ही में भारत के साथ रिश्ते खराब होने पर उसने एक्सपोर्ट सीमित कर दिया, जिससे हमारी ऑटो और टेक इंडस्ट्री को झटका लगा।

तेल का जमाना गया, अब मैगनेट की बारी!
70 के दशक में अरब देशों ने तेल से दुनिया को हिलाया था। अब वही खेल रेयर अर्थ मिनरल्स के साथ हो रहा है। क्लाइमेट चेंज के दौर में फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल, डीजल, कोयला) का जमाना ढल रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन, स्मार्टफोन, और रिन्यूएबल एनर्जी का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। 2024 में ग्लोबल इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट 20% की दर से बढ़ा, और इसके लिए रेयर अर्थ मिनरल्स जरूरी हैं। अगर सप्लाई रुकी, तो न टेस्ला चलेगी, न आपका स्मार्टफोन बनेगा।

भारत का गेम चेंजर मौका
अब बात भारत की। दुनिया के रेयर अर्थ रिजर्व में चीन पहले नंबर पर है (4.4 करोड़ टन), ब्राजील दूसरे पर (2.1 करोड़ टन), और तीसरे नंबर पर हमारा भारत, जिसके पास 69 लाख टन का भंडार है। लेकिन अभी ये मिनरल्स जमीन में ही दबे हैं। भारत ने इस दिशा में कदम उठाना शुरू किया है। नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत सरकार खनन, रिफाइनिंग, और मैगनेट प्रोडक्शन पर काम कर रही है। 2024 में भारत ने सिर्फ 2900 टन रेयर अर्थ प्रोड्यूस किया, जो ग्लोबल प्रोडक्शन का 1% से भी कम है। लेकिन अब नए प्रोजेक्ट्स शुरू हो रहे हैं, जैसे त्रावणकोर में रेयर अर्थ मैगनेट प्लांट। एक यूजर ने ट्वीट किया, “भारत का समय आ गया! रेयर अर्थ में हम गेम चेंजर बन सकते हैं।”

ब्राजील: उभरता सितारा
ब्राजील भी इस रेस में बड़ा खिलाड़ी बन सकता है। उसके पास 23% ग्लोबल रिजर्व हैं, और हाल ही में सेर्रा वर्डे ने गोआस में प्रोडक्शन शुरू किया। 2026 तक ब्राजील 5000 टन रेयर अर्थ ऑक्साइड प्रोड्यूस करने की योजना बना रहा है। ये नियोडिमियम, प्रासियोडिमियम जैसे मैगनेटिक मिनरल्स का ग्लोबल सप्लाई में बड़ा योगदान देगा।

चुनौतियां और भविष्य
भारत और ब्राजील के लिए रास्ता आसान नहीं। रेयर अर्थ मिनरल्स को निकालना और रिफाइन करना महंगा और जटिल है। पर्यावरणीय नुकसान भी बड़ा मुद्दा है, क्योंकि माइनिंग में रेडियोएक्टिव वेस्ट निकलता है। चीन ने दशकों पहले ये सिस्टम बना लिया, लेकिन भारत को अभी इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, और निवेश चाहिए। फिर भी, भारत की कोशिशें उम्मीद जगाती हैं। ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, और अमेरिका जैसे देश भी इस रेस में हैं, लेकिन चीन की बादशाहत को चुनौती देने में समय लगेगा।

  • रिजर्व्स: चीन (4.4 करोड़ टन), ब्राजील (2.1 करोड़ टन), भारत (69 लाख टन)। स्रोत: USGS 2025, बॉल्टिमोर क्रॉनिकल।
  • प्रोडक्शन: 2024 में चीन ने 2.7 लाख टन, भारत ने 2900 टन रेयर अर्थ प्रोड्यूस किया।
  • भारत का मिशन: नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन 2024 में लॉन्च। त्रावणकोर में पहला रेयर अर्थ मैगनेट प्लांट प्रस्तावित।
  • विवाद: चीन की एक्सपोर्ट पाबंदियों ने भारत की ऑटो और टेक इंडस्ट्री को प्रभावित किया।
  • अस्वीकरण: रेयर अर्थ मिनरल्स का प्रोडक्शन और रिफाइनिंग पर्यावरणीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों से भरा है। भारत की प्रोग्रेस अभी शुरुआती चरण में है।

रेयर अर्थ मिनरल्स आज की दुनिया का नया तेल हैं। चीन ने इस खजाने पर कब्जा जमाकर दुनिया को अपनी मुट्ठी में कर रखा है। लेकिन भारत, जिसके पास तीसरा सबसे बड़ा रिजर्व है, अब इस खेल में कूद पड़ा है। नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन और नए प्रोजेक्ट्स के साथ भारत भविष्य की टेक्नोलॉजी रेस में बड़ा दांव खेल सकता है। सवाल ये है कि क्या हम इस मौके को भुना पाएंगे? उंगलियां क्रॉस रखिए, क्योंकि चुंबकों का जमाना शुरू हो चुका है!