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शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष कहानी: लखनऊ से ISS तक, राकेश शर्मा से प्रेरणा, राजनाथ सिंह ने किया सम्मान

24 अगस्त 2025 को दिल्ली के सुब्रतो पार्क में वायुसेना सभागार में एक खास मौका था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुभांशु शुक्ला, जिन्हें प्यार से शुक्स बुलाया जाता है, और गगनयान मिशन के लिए चुने गए अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को सम्मानित किया। लखनऊ के इस बेटे ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की थी और अपने अनुभवों ने सबका दिल जीत लिया। उन्होंने बताया कि बचपन में वो शर्मीले थे और राकेश शर्मा की 1984 की अंतरिक्ष यात्रा की कहानियों से प्रेरित हुए। एक X यूजर ने लिखा, “शुभांशु ने बस्तर से अंतरिक्ष तक का सफर तय किया, गर्व है!” आइए, उनकी इस प्रेरक कहानी को आसान और रोचक अंदाज में जानते हैं।

शर्मीले लड़के से अंतरिक्ष यात्री तक
लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला (40) एक साधारण परिवार से हैं। बचपन में वो बेहद शर्मीले और संकोची थे। राकेश शर्मा की अंतरिक्ष कहानियां सुनकर उनके मन में अंतरिक्ष का सपना जगा। लेकिन, रक्षा बल में जाने का कोई इरादा नहीं था। एक दोस्त ने NDA का फॉर्म खरीदा, और बस यूं ही उन्होंने इसे भरा और भारतीय वायुसेना (IAF) में शामिल हो गए। शुक्ला कहते हैं, “वायुसेना और कॉकपिट मेरे सबसे बड़े गुरु रहे।” उनकी मेहनत ने उन्हें सु-30 MKI, मिग-21, मिग-29 जैसे फाइटर जेट्स में 2,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव दिलाया।

एक्सिओम-4: भारत का गौरव
शुभांशु ने एक्सिओम-4 मिशन में बतौर पायलट ISS की 20 दिन की यात्रा की। वो पहले भारतीय बने, जिन्होंने ISS पर कदम रखा। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रैविटी) में काम करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन मजेदार भी। उन्होंने 16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त देखे, जो उनके लिए जादुई अनुभव था। खासकर, पृथ्वी का रात्रि दृश्य, जिसमें भारत के कुछ हिस्से दिखे, उनके लिए सबसे खूबसूरत था। एक वीडियो साझा करते हुए उन्होंने कहा, “ये दृश्य मेरे दिल में बस गया।” X पर एक यूजर ने लिखा, “शुभांशु ने भारत को अंतरिक्ष में चमकाया!”

सम्मान और प्रेरणा
सुब्रतो पार्क में आयोजित कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने शुभांशु और गगनयान के अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की तारीफ की। शुभांशु ने साउथ ब्लॉक में रक्षा मंत्री से मुलाकात की और एक्सिओम-4 के प्रयोगों, चुनौतियों, और गगनयान मिशन पर चर्चा की। इस मिशन ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान (2027) और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए नींव मजबूत की। कार्यक्रम में 100 से ज्यादा छात्र शामिल हुए। जय वशिष्ठ नाम के छात्र ने कहा, “शुभांशु सर से मिलकर मैं वायुसेना में जाने का सपना देख रहा हूँ।” वहीं, अश्विना त्रिपाठी ने बताया कि वो उनकी कहानी से प्रेरित हुईं।

शुभांशु का संदेश
शुभांशु ने कहा, “एक्सिओम-4 भारत के लिए सही समय पर मिली उपलब्धि है। इससे मिली सीख गगनयान और भविष्य के मिशनों के लिए काम आएगी।” उन्होंने युवाओं से अंतरिक्ष अन्वेषण में शामिल होने का आह्वान किया, बोले, “संभावनाएं अनंत हैं! सेल्फी और ऑटोग्राफ की भीड़ में वो अपनी पत्नी कामना शुक्ला और बेटे का ख्याल रखते दिखे। X पर एक यूजर ने लिखा, “शुभांशु का सादगी भरा अंदाज दिल जीत लेता है।”

  • तारीख: 24 अगस्त 2025।
  • कार्यक्रम: दिल्ली के सुब्रतो पार्क, वायुसेना सभागार में सम्मान समारोह।
  • प्रतिभागी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शुभांशु शुक्ला, गगनयान के अन्य अंतरिक्ष यात्री।
  • शुभांशु का बैकग्राउंड: लखनऊ में जन्म, IAF में 2,000+ घंटे उड़ान, एक्सिओम-4 मिशन में ISS की 20-दिन की यात्रा।
  • स्रोत: timesofindia.indiatimes.com, isro.gov.in, india.com, और X पोस्ट्स।
  • विवाद: कोई विवाद नहीं। जानकारी विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित।
  • अस्वीकरण: कुछ व्यक्तिगत अनुभवों का सत्यापन स्वतंत्र रूप से नहीं किया जा सका।

शुभांशु शुक्ला की कहानी हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। लखनऊ के एक शर्मीले लड़के से लेकर ISS तक का उनका सफर दिखाता है कि सपने मेहनत से सच हो सकते हैं। गगनयान मिशन और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की राह में उनकी उपलब्धि मील का पत्थर है। क्या आप भी अंतरिक्ष की दुनिया में कदम रखना चाहेंगे?