किसानों के लिए यह खेती नहीं…’नोट छापने की मशीन’ है, बस करे इस फसल को बोन की तैयारी, होगा लाखो का फायदा,देखे पूरी प्रोसेस…

किसानों के लिए यह खेती नहीं…’नोट छापने की मशीन’ है, बस करे इस फसल को बोन की तैयारी, होगा लाखो का फायदा,देखे पूरी प्रोसेस…एक समय ऐसा था जब गरीब का अनाज बाजरा को समझा जाता था , लेकिन यह अब ‘सुपरफूड’ के तौर पर अपनी पहचान बना रहा है. हेल्थ के प्रति बढ़ती जागरूकता, सरकारी प्रोत्साहन और निर्यात की बढ़ती मांग के चलते
अब बाजरे की खेती किसानों के लिए लखपति बनने का नया जरिया बन सकती है. असल में बाजरे की खेती में कम लागत और अच्छी पैदावार की क्षमता होती है, ये खासकर उन क्षेत्रों में जहां पानी की कमी है वहाँ के लिए बेस्ट है. तो अगर किसान इसकी खेती के कुछ खास पहलुओं को समझ लें, तो यह उन्हें मालामाल कर सकती है.
बाजरे की खेती 2025 Millet cultivation 2025
आपको बता दें कि बाजरा, जिसे ज्वार, रागी और अन्य मोटे अनाजों के साथ ‘मिलेट’ (Millets) लिस्ट में रखा गया है, कई कारणों से किसानों के लिए एक शानदार ऑप्शन बन गया है:
1. बढ़ती बाज़ार मांग:वैसे बाजरा ग्लूटेन-फ्री (Gluten-free) होता है और प्रोटीन, फाइबर, आयरन व अन्य पोषक तत्वों से फुल भरपूर होता है. आज के समय में शहरी उपभोक्ताओं में इसकी लोकप्रियता खूब बढ़ी है.भारत सरकार ‘अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष 2023’ (International Year of Millets 2023) के बाद से बाजरे सहित मोटे अनाजों के उत्पादन और खपत को बढ़ावा दे रही है. यही कारण है कि अब मंडियों में भी इनकी खरीद को प्राथमिकता मिल रही है. इसके अलावा दुनिया भर में मिलेट्स की मांग बढ़ रही है, जिससे निर्यात के अवसर भी बढ़ रहे हैं.
2. कम लागत, बेहतर पैदावार:बाजरा एक प्रकार का सूखा-सहिष्णु फसल है, यानी इसमे बहुत कम पानी की ज़रूरत होती है. यह उन किसानों के लिए बेस्ट है जो कम वर्षा वाले क्षेत्रों में रहते हैं. इसके साथ ही बाजरा की खेती में अन्य फसलों की तुलना में कम उर्वरक और कीटनाशकों की आवश्यकता होती है, जिससे लागत कम आती है. हालांकि बाजरे के साथ आप अंतर-फसल भी कर सकते हैं, जैसे कि दालें या सब्जियां आदि जिससे आय और बढ़ जाती है.
3. जलवायु परिवर्तन का सामना:आपको बता दें कि बदलते मौसम और अप्रत्याशित बारिश के समय में भी बाजरा जैसी सूखा-सहिष्णु फसलें किसानों के लिए एक सुरक्षित विकल्प प्रदान करती हैं.
बाजरे की खेती कैसे करें और क्या बातें जानना जरूरी?
बाजरे की खेती को आसान और लाभदायक बनाने के लिए इन बातों का रखे ध्यान-
1. उपयुक्त मिट्टी और जलवायु:खेती की लिए बाजरा लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, लेकिन बलुई दोमट या मध्यम काली मिट्टी सबसे अच्छी होती है. मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए. वैसे बाजरा गर्म और शुष्क जलवायु पसंद करता है. 25°C से 35°C का तापमान इसके लिए आदर्श है. बुवाई के समय हल्की बारिश और बढ़ने के दौरान तेज़ धूप फायदेमंद मानी जाती है.
2. खेत की तैयारी:आपको बता दें बाजरा के लिए खेत को 2-3 बार जुताई करके अच्छी तरह से तैयार करें. मिट्टी को भुरभुरा बनाएं और खरपतवार मुक्त करना चाहिए साथ ही अच्छी जल निकासी का प्रबंध भी करें.
3. सही किस्म का चुनाव और बुवाई :इसकी खेती के लिए अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल उन्नत और उच्च उपज वाली किस्मों का चयन करें. सही किस्म के चयन से ही अच्छा मुनाफा मिल सकता है. इसके अलावा आमतौर पर बाजरे की बुवाई मानसून की शुरुआत में (जून के अंत से जुलाई के मध्य तक) की जाती है. अगेती बुवाई से अच्छी पैदावार मिल सकती है. इसकी बुवाई पंक्तियों के बीच 45-60 सेमी और पौधों के बीच 10-15 सेमी की दूरी रखें.
5. उर्वरक और पानी :इसके लिए खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ 4-5 टन गोबर की खाद या कंपोस्ट डालें. वैसे बाजरा एक सूखा-सहिष्णु फसल होती है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए क्रांतिक अवस्थाओं (जैसे फूल आने और दाना भरने के समय) पर 1-2 हल्की सिंचाई फायदेमंद साबित हो सकती है, यदि बारिश अपर्याप्त हो.
7. खरपतवार नियंत्रण और कीट/रोग प्रबंधन और कटाई :बुवाई के बाद खरपतवार नियंत्रण बहुत ज़रूरी है, क्योंकि वे उपज को काफी कम कर सकते हैं. निराई-गुड़ाई या शाकनाशी का उपयोग करें. वैसे आमतौर पर बाजरा 75-90 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाता है और किसान इसकी कटाई कर सकते हैं. हालांकि कटाई के बाद इसको अच्छी तरह सुखाकर सेफ जगह पर स्टोर करें ताकि नमी से होने वाले नुकसान से बचा जा सके.
कितना मुनाफा हो सकता है? (अनुमानित)
आपको बता दें कि बाजरे की उन्नत किस्मों और सही तकनीक का यूज करके किसान प्रति एकड़ करीब -15 क्विंटल तक की पैदावार ले सकते हैं. वैसे बाज़ार मूल्य करीब ₹2,500 से ₹3,500 प्रति क्विंटल या इससे ज़्यादा हो सकता है.
उदाहरण: मान लें कि अगर बाजरा की १२ से १५क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार होती है और मार्केट का भाव करीब ₹3,000 प्रति क्विंटल है, तो प्रति एकड़ लगभग 36,000 रुपये की आय हो सकती है. इसमें प्रति एकड़ लागत लगभग ₹8,000 से ₹12,000 तक की लागत आ सकती है. यानी शुद्ध मुनाफा प्रति एकड़ 24,000 रुपए से ₹28,000 या इससे ज़्यादा का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है.
बड़े पैमाने पर बाजरा की खेती
यानी की साफ है कि अगर बड़े पैमाने पर बाजरा की खेती करने वाले किसान आसानी से लखपति बन सकते हैं, खासकर अगर वो किसान जो 7-10 एकड़ में बाजरे की खेती करते हैं. वैसे इस खेती पर राज्य सरकार अलग अलग सब्सिडी दे रही हैं.बाजरे की संकर प्रजाति के बीज पर अनुदान उपलब्ध करा रही यूपी की सरकार.
आज के समय में बाजरे की खेती अब सिर्फ पारंपरिक फसल नहीं रह गई है, बल्कि किसान के लिए यह एक स्मार्ट और मुनाफे वाला कृषि ऑप्शन बन चुकी है. फिलहाल बढ़ती मांग, कम लागत और सरकारी सहायता इसे किसानों के लिए ‘लखपति’ बनने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करती है. आज जाएँगे कैसे इस खेती को किसान करें.
(डिस्क्लेमर :-खबर केवल जानकारी के लिए है, खेती कैसे करना है और करना है नहीं ये किसान के ऊपर है)





