Sheep Farming: गाय-बकरी से भी नहीं लाइन में, मुजफ्फरनगरी भेड़ के पालन से होगी छप्परफाड़ कमाई, जाने A TO Z जानकारी

Sheep Farming: गाय-बकरी से भी नहीं लाइन में, मुजफ्फरनगरी भेड़ के पालन से होगी छप्परफाड़ कमाई, जाने A TO Z जानकारी। भारत में पशुपालन किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, और इसमें मुजफ्फरनगरी भेड़ पालन तेजी से Popular हो रहा है।
यह नस्ल, जो मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर और बुलंदशहर जैसे क्षेत्रों में पाई जाती है, अपने मांस और ऊन के लिए जानी जाती है। यह नस्ल भारतीय जलवायु में आसानी से ढल जाती है और इसकी मृत्यु केवल 2% के आसपास है, जो इसे अन्य नस्लों से अलग बनाती है।
Muzaffarnagari Sheep Farming से तीन तरह का मुनाफा
- मांस उत्पादन से आय
मुजफ्फरनगरी भेड़ मुख्य रूप से अपने अधिक जानकारी वाले मांस के लिए पाली जाती है। इस नस्ल की भेड़ों का वजन 100 किलो तक हो सकता है, और इनका मांस चिकनाई (fat content) के कारण उत्तर भारत, खासकर हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में बहुत पसंद किया जाता है। एक भेड़ से 15-20 किलो मांस आसानी से प्राप्त हो सकता है। अगर एक मेमने को 3,000 रुपये में खरीदा जाए, तो 6 महीने बाद इसे 8,000-10,000 रुपये में बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बिरयानी के लिए इस नस्ल के मांस की भारी मांग है। - ऊन से अतिरिक्त कमाई
हालांकि मुजफ्फरनगरी भेड़ की ऊन की गुणवत्ता बहुत अच्छी नहीं होती, फिर भी यह मोटी और खुली होती है, जिसे कंबल और गलीचे बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। हर छह महीने में एक भेड़ से 600 ग्राम तक ऊन प्राप्त की जा सकती है। अगर सही देखभाल की जाए, तो 2.5-3 किलो ऊन सालाना मिल सकती है, जिसे बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। - जैविक खाद और चमड़ा
भेड़ का गोबर एक उत्कृष्ट जैविक उर्वरक है, जो खेतों की उर्वरता बढ़ाता है। यह 8-10 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है, जिससे रोजाना 200-300 रुपये की कमाई हो सकती है। इसके अलावा, भेड़ की खाल से जैकेट और चमड़े के उत्पाद बनाए जाते हैं, जो बाजार में अच्छी कीमत पर बिकते हैं।
Muzaffarnagari Sheep Farming में ध्यान रखने वाली बातें
- उन्नत नस्ल का चयन: हमेशा स्वस्थ और उन्नत नस्ल की भेड़ खरीदें। मुजफ्फरनगरी भेड़ का चयन करते समय उनके वजन, स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता की जांच करें।
- स्वच्छता और स्वास्थ्य: भेड़ों को ब्लू टंग, पीपीआर और निमोनिया जैसी बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण करवाएं। स्वच्छ और हवादार शेड बनाएं, जो गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म रहे।
- पौष्टिक आहार: भेड़ों को हरे चारे, ज्वार, बाजरा और मक्का खिलाएं। विटामिन्स और खनिजों की कमी से बचने के लिए संतुलित आहार दें, ताकि एनीमिया या डायरिया जैसी समस्याएं न हों।
- प्रजनन प्रबंधन: गर्भवती भेड़ों को अलग रखें और उनकी विशेष देखभाल करें। एक मादा भेड़ साल में दो बार 1-2 बच्चे दे सकती है, जो बाद में बिक्री के लिए तैयार होते हैं।
- बाजार की मांग: मांस और ऊन की बिक्री के लिए स्थानीय और बाहरी बाजारों का अध्ययन करें। कश्मीर और आंध्र प्रदेश जैसे क्षेत्रों में मांस की अच्छी मांग है।
Muzaffarnagari Sheep Farming सबसे ज्यादा बिकने वाले 5 राज्य
- आंध्र प्रदेश: यह भेड़ पालन और मांस उत्पादन में शीर्ष पर है। नेल्लोर नस्ल की भेड़ें यहाँ सबसे ज्यादा पाली जाती हैं।
- राजस्थान: यहाँ भेड़ों के झुंड (रेवड़) की संख्या अधिक है, और मांस के साथ-साथ ऊन उत्पादन भी होता है।
- कर्नाटक: मंड्या नस्ल की भेड़ें यहाँ मांस के लिए लोकप्रिय हैं।
- तमिलनाडु: यहाँ मांस और चमड़े की मांग अधिक है।
- तेलंगाना: नेल्लोर और अन्य नस्लों के कारण यहाँ मांस उत्पादन में तेजी है।
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Muzaffarnagari Sheep Farming पालन कैसे ?
भारत में भेड़ों को मुख्य रूप से मांस और ऊन के लिए पाला जाता है। हालांकि सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन BAHS की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक भेड़ से औसतन 9 किलो मांस प्राप्त होता है, जबकि फीडर लैम (50 किलो तक की भेड़) से 15-20 किलो मांस मिलता है। देश में हर साल लाखों भेड़ें मांस के लिए काटी जाती हैं, खासकर त्योहारों और विशेष अवसरों पर। यह संख्या बाजार की मांग और क्षेत्रीय खपत पर निर्भर करती है।





